आप ग्रामीणांचल के इस प्रतिष्ठित सक्रिय महाविद्यालय के छात्र/छात्राएँ है जो विगत सत्र की परीक्षा में सफल होकर अपने पाठ्यक्रम के शेष भाग के पूरा करने के लिये आगामी सत्र में भी नियमित रूप से अध्ययन करेंगे। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये मैं उनको बधाई देता हूँ। प्रिय विद्यार्थियों जो स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश पा रहे है हम महाविद्यालय परिवार की ओर से उनका हार्दिक स्वागत करते हैं और आशा करते है कि आप सब महाविद्यालय में अनुशासित होकर एक अच्छे नागरिक की पहचान उच्च शिखर तक पहुँचाएगें। इस शिमलाना की पवित्र धरा को उच्च शिखर पर लाने के लिए आप और हम निरन्तर तत्पर हैं जिससे सभी ज्ञान रूपी गंगा से पवित्र होकर ज्ञान अभिवृद्धि का बोध उत्पन्न करते हैं।
विद्यार्थियों से हमें पूर्ण आशा है कि वे कक्षाओं में समय पर पूर्ण अनुशासन में आकर ध्यानपूर्वक अध्ययन करेंगे और महाविद्यालय द्वारा निर्धारित वेशभूषा व कॉलेज परिचय-पत्र लेकर ही महाविद्यालय परिसर में प्रवेश करने की अनिवार्यता में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए महाविद्यालय में वी०एस०सी० की कक्षाएं प्रारम्भ हो चुकी है। जिससे छात्र/छात्राऐं अब बी०ए०, बी०कॉम० के साथ बी०एस-सी० में भी प्रवेश ले सकेंगे।
महाविद्यलाय के अनुभवी प्रबन्ध-तन्त्र से हम आपको और अधिक ऊर्जावान, कार्यवान, तेजस्वी व जिज्ञासु बनाने को सदैव तत्पर है जिससे आप लाभान्वित होकर निरन्तर प्रगति, उन्नति व उत्थान के पथ पर अग्रसर हो।
महाविद्यलाय में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिये शुभकामनाओं सहित.........
- प्राचार्य
महाविद्यालय का परिचय
अत्यन्त गौरवमयी संस्था महाराणा प्रताप मैमोरियल डिग्री कॉलेज शिमलाना, सहारनपुर (उ०प्र०) एक बहुत ही प्राचीन संस्था है जो कि सदैव प्रगति के पथ पर अग्रसर है। यह संस्था नर्सरी से लेकर आज उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली ग्रामीणाचल की एक बहुत ही अग्रणी व विकासशील संस्था है तो कि सदैव प्रगति के पथ पर अग्रसर है, ध्यान रहे वह महान विभूति जिसने आज से लगभग 60 वर्ष पहले शिमलाना के ग्रामीणांचल में यह एक दीपक प्रज्जवलित किया जो कि निरन्तर अपनी गौरवमयी आभा से सभी को प्रकाशित व प्रज्जवलित कर रहा है। महात्मा लटूर सिंह ने अपने इस दीपक रूपी ज्ञान से वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की अमरगाथा को पुनः स्मरण कर शिमलाना को एक अलग व नयी पहचान प्रदान की। महात्मा लटूर सिंह द्वारा बोये गए पौधे के ज्ञान रूपी फल से हमारे ग्रामीणांचल के युवा ज्ञान प्राप्त कर लाभान्वित होकर निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर है।
महाविद्यालय निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर होते हुये महाविद्यालय में बी०एस-सी० विषय की कक्षाएँ आरम्भ हो चुकी है भविष्य में मांग के अनुसार जिससे जिज्ञासु व कार्यशील युवाओं को उसका पूरा लाभ प्राप्त हो सके, समय-समय पर उन्हें लागु करना है। हम भविष्य में अनेक पाठ्यक्रमों को लागू करने की ओर अग्रसर है।
पुस्तकालय एवं वाचनालय
महाविद्यालय में एक सम्पन्न पुस्तकालय स्थित है जिसमें विभिन्न विषयों में पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध है तथा छात्र-छात्राओं को पुस्तकालय में अध्ययन करने की सुविधा उपलब्ध है। महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं को ज्ञानवर्द्धन हेतु वाचनालय की भी सुविधा प्राप्त है जिसमें दैनिक समाचार-पत्र प्रमुख हिन्दी, अंग्रेजी भाषाओं में पत्रिकाएँ व शोध पत्रिकाएँ पढ़ने की सुविधा है।
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